10 अगस्त, 2020|9:05|IST

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ई-वाहन:चीन से आयात पर सख्ती से दूर हो रहे निवेशक, 80 फीसदी आयात पर निर्भर हैं कंपनियां

देश में पिछले कुछ वर्षों से इलेक्ट्रिक वाहन और खासकर दोपहिया और तिपहिया में कई स्टार्टअप कारोबार में उतरे हैं। इन कंपनियों को रतन टाटा सहित सॉफ्टबैंक और टाइगर ग्लोबल जैसे निवेशकों ने भारी-भरकम राशि निवेश की। लेकिन भारत-चीन सीमा पर विवाद बढ़ने और चीन के उत्पादों पर सख्ती के बाद ई-वाहन कंपनियों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। भारतीय ई-वाहन कंपनियों के 80 फीसदी उपकरण चीन से आयात होते हैं। इससे विदेशी निवेशक दूर होने लगे हैं।

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मामले से जुड़े तीन सूत्रों ने कहा कि आने वाले दिन ई-वाहन कंपनियों के लिए बेहद मुश्किल होने वाले हैं क्योंकि उन्हें निवेश जुटाने में बेहद कठिनाई का सामना करना पड़ेगा। विशेषज्ञो का कहना है कि इसका सबसे ज्यादा असर ई-वाहन क्षेत्र के स्टार्टअप पर पडे़गा। ई-वाहन क्षेत्र की स्टार्टअप मजेंटाचार्ज ग्रिड एमडी मैक्सन लेविस का कहना है कि देश में 500 से 600 के करीब स्टार्टअप ई-वाहन क्षेत्र में काम कर रहे हैं।

बिजनेस ई-वाहन कंपनियों ने इतनी जुटाई पूंजी

कंपनी महीना और वर्ष जुटाई गई राशि (करोड़ डॉलर)
ओला इलेक्ट्रिक जुलाई 2019 25
बाउंस जनवरी 2020 9.9
बाउंस जून 2019 7.3
ओला इलेक्ट्रिक फरवरी 2019 5.8
वोगो जनवरी 2020 3.5

उनका कहना है कि इनमें से 50 फीसदी का लगभग पूरा कारोबार चीन के आयात पर निर्भर है। ऐसे में चीन से आयात पर पाबंदी से इन्हें केवल उत्पादन निर्माण ही मुश्किल नहीं आएगी बल्कि निवेशक भी दूर होंगे क्योंकि लागत बढ़ने से मुनाफा घटेगा। उनका कहना है कि कई कंपनियां 100 फीसदी आयात पर ही निर्भर हैं जिन्हें ज्यादा मुश्किल होगी। लिथियम सेल, बैटरी पैक और इलेक्ट्रकि मोटर चीन से ही आायत किए जाते हैं।

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विशेषज्ञों का कहना है कि अब निवेशक काफी पड़ताल करने लगे हैं। पिछले दो वर्षों में केन्द्र सरकार ने ई-वाहन क्षेत्र के प्रोत्साहन के लिए कई कदम उठाएं हैं। इनमें 10 हजार करोड़ रुपये के प्रोत्साहन योजना फेम भी शामिल है। हालांकि, इसका लाभ लेने के लिए स्टार्टअप को कई मानदंडो पर खरा उतरना होगा। जबकि विदेशी निवेश उनके लिए आसान होता है। 

चुनौतियां

  • 600 के करीब स्टार्टअप ई-वाहन बाजार में है
  • 80 फीसदी उपकरण ई-वाहन के चीन से आते हैं
  • 1 कंपनी इस साल अब तक जुटाई पाई है विदेशी निवेश
  • 10 करोड़ डॉलर जुटाई है रेसएनर्जी ने इस साल 
  • 3.2 करोड़ डॉलर जुटाया था अथर एनर्जी ने पिछले साल
  • 2.2 करोड़ जुटाया था 2018 में हीरो इलेक्ट्रि ने 2018 में

इन कंपनियों ने जमकर किया निवेश

 पिछले दो साल में भारतीय ई-वाहन क्षेत्र और उससे जुड़े स्टार्टअप में देसी और विदेशी सभी तरह के निवेशकों ने पैसा लगाया है।  ई-वाहन क्षेत्र के स्टार्टअप अथर एनर्जी, मजेंटा पावरग्रिड, ओला इलेक्ट्रिक, यूलो और लिथियम अर्बन टेक्नोलॉजी ने सॉफ्टबैंक और टाइगर ग्लोबल जैसे संस्थागत निवेशकों से अच्छी राशि हासिल की। इसके अलावा रतन टाटा और हीरो समूह के पवन मुंजाल ने भी स्टार्टअप में निवेश किया।

चीन पर सख्ती से निवेशक सहमे

पिछले पांच साल में चीन की अलीबाबा और अंट फाइनेंशियल सहित कई दिग्गज कंपनियों ने भारतीय स्टार्टअप में जमकर निवेश किया। भारत के 30 बड़े स्टार्टअप जिनका औतस बाजार मूल्य 7600 करोड़ रुपये से अधिक है उनमें 18 कंपनियों ने चीन की कंपनियों ने भारी-भरकम निवेश किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत-चीन सीमा पर बढ़ते तनाव के बीच नियमों में सख्ती से अब विदेशी निवेशक डरने लगे हैं।

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